भाजपा क्यो हैं भ्रम में?

यह लेख जब मैं लिख रहा हूँ तो कोई भी मुझसे यह प्रश्न अत्यंत सहजता से कर सकता है कि क्या मैं भाजपा के राजनीतिक स्वास्थ्य की कामना करते हुए स्वयं को निष्पक्ष मान सकता हूँ तो निश्चय ही कोई तटस्थ हुये बिना भी निष्पक्ष हो सकता है। बौद्धिक वर्ग में तटस्थता जैसी कोई वस्तु नहीं होती क्योंकि प्रत्येक व्यक्ति किसी न किसी विचार का पोषण अवश्य करता है और बौद्धिक व्यक्ति का दायित्व यह होता है कि वह निष्पक्ष होकर अपने पक्ष रखे। इसी धर्म का पालन करते हुए वर्तमान परिस्थितियों में भाजपा की राजनीतिक दशा और दिशा की समीक्षा करने का प्रयास इस लेख में कर रहा हूँ। Read more