प्रकृति का सन्देश

आज प्रकृति आहत सी दिखती बार बार संकेत भेजती
पर हमने वह चेतन खॊया जो अब यह संकेत पढ़े
पंचमहाभूतों की सत्ता से कब को शरीर को पृथक किया
लोभ स्वार्थ का पुंज बनाकर संकीर्ण भाव से घेर लिया
यही सभ्यता मानव की सदियों से पहचान बनी
हमने इसका अनुगामी बनकर अपना जो था भुला दिया
अब अवसर है जाग उठें हम चेतन का विस्तार करें
कर्मवाद की महिमा के संग ब्रहवाद आचार धरें |
( नेपाल में भूकम्प त्रासदी पर)

प्रकृति का सन्देश

आज प्रकृति आहत सी दिखती बार बार संकेत भेजती
पर हमने वह चेतन खॊया जो अब यह संकेत पढ़े
पंचमहाभूतों की सत्ता से कब को शरीर को पृथक किया
लोभ स्वार्थ का पुंज बनाकर संकीर्ण भाव से घेर लिया
यही सभ्यता मानव की सदियों से पहचान बनी
हमने इसका अनुगामी बनकर अपना जो था भुला दिया
अब अवसर है जाग उठें हम चेतन का विस्तार करें
कर्मवाद की महिमा के संग ब्रहवाद आचार धरें |
( नेपाल में भूकम्प त्रासदी पर)

प्रकृति का सन्देश

आज प्रकृति आहत सी दिखती बार बार संकेत भेजती
पर हमने वह चेतन खॊया जो अब यह संकेत पढ़े
पंचमहाभूतों की सत्ता से कब को शरीर को पृथक किया
लोभ स्वार्थ का पुंज बनाकर संकीर्ण भाव से घेर लिया
यही सभ्यता मानव की सदियों से पहचान बनी
हमने इसका अनुगामी बनकर अपना जो था भुला दिया
अब अवसर है जाग उठें हम चेतन का विस्तार करें
कर्मवाद की महिमा के संग ब्रहवाद आचार धरें |
( नेपाल में भूकम्प त्रासदी पर)